प्रिय संध्या
writing was always dangerous for me
y, u will ask, y
लिखना हमेशा बहुत मुश्किल था
क्यूंकि, वंहा कोई भी मेरा godfather नही था
फिर भी मई करती रही
क्यूंकि, psc में waiting में फेंक दिए जाने के बाद
अपनी spoiled घरु जिंदगी में , मई बहुत अकेली
बदहवास सी जी रही थी
मायके वालों में कोई पूछता न था
जो कुछ था , अपना लिख कर बयान था
अपने बेटे को कलेजे से लगाये जीना था
लिखती रही
घर से अलग भी हुई
तो, फिरसे घर से मुझे पैसा मिला
मुझे लिखने की अंधी chah चाह ने कभी सर नही उठाने दिया
लिखकर, कागज रंग भर रही थी
दो बार मुंबई गयी
स्टॉक में अंधाधुन्द पैसा गंवाया
सब तरफ से बर्बादी झेली
और बताउंगी, क्ल……
ये ठीक हुआ, की आप इस औघड़ दुनिया की गिरफ्त से
निकल गयी। …क्न्हि पहचान हो तो, लिखे
वरना अंधे कुएं में डालने से कोई मतलब नही। .......
ynha ajkl
आजकल, करपोरेट लेखन के युग में हमें कोई नही पूछने वाला वंहा
अब, लेखन जगत वैसा नही रहा
ये संघर्ष जीवन भर का है
किन्तु, एक लड़की विवाह
और , उसका परिवार उसे सहारा देता है
ये सच है कि मैंने दुःख झेले
किन्तु, मेरा घर ही मेरा आश्रय रहा
मुझे वंही से आर्थिक सहारा रहा
अंत में मई घर -परिवार की सेवा में हूँ
ये मेरा सौभाग्य है
क्यूंकि, बहुत लिखने बाद भी
मई पारिवारिक -किस्म की ही रही
फिर भी, मई इन्ही चाहूंगी
कि , आज की लड़की , लेखन करे भी तो, कोई आर्थिक संबल मिला के करे
writing was always dangerous for me
y, u will ask, y
लिखना हमेशा बहुत मुश्किल था
क्यूंकि, वंहा कोई भी मेरा godfather नही था
फिर भी मई करती रही
क्यूंकि, psc में waiting में फेंक दिए जाने के बाद
अपनी spoiled घरु जिंदगी में , मई बहुत अकेली
बदहवास सी जी रही थी
मायके वालों में कोई पूछता न था
जो कुछ था , अपना लिख कर बयान था
अपने बेटे को कलेजे से लगाये जीना था
लिखती रही
घर से अलग भी हुई
तो, फिरसे घर से मुझे पैसा मिला
मुझे लिखने की अंधी chah चाह ने कभी सर नही उठाने दिया
लिखकर, कागज रंग भर रही थी
दो बार मुंबई गयी
स्टॉक में अंधाधुन्द पैसा गंवाया
सब तरफ से बर्बादी झेली
और बताउंगी, क्ल……
ये ठीक हुआ, की आप इस औघड़ दुनिया की गिरफ्त से
निकल गयी। …क्न्हि पहचान हो तो, लिखे
वरना अंधे कुएं में डालने से कोई मतलब नही। .......
ynha ajkl
आजकल, करपोरेट लेखन के युग में हमें कोई नही पूछने वाला वंहा
अब, लेखन जगत वैसा नही रहा
ये संघर्ष जीवन भर का है
किन्तु, एक लड़की विवाह
और , उसका परिवार उसे सहारा देता है
ये सच है कि मैंने दुःख झेले
किन्तु, मेरा घर ही मेरा आश्रय रहा
मुझे वंही से आर्थिक सहारा रहा
अंत में मई घर -परिवार की सेवा में हूँ
ये मेरा सौभाग्य है
क्यूंकि, बहुत लिखने बाद भी
मई पारिवारिक -किस्म की ही रही
फिर भी, मई इन्ही चाहूंगी
कि , आज की लड़की , लेखन करे भी तो, कोई आर्थिक संबल मिला के करे
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