अरे संध्या
तुम भी
मई इधर थोड़ी व्यस्त थी
घर के कामों में
नही आ सकी
आप ऐसा नही सोचें
कृष्ण की मुझे पर
बहुत कृपा है
वे मेरी रक्षा करते है
मुझे कोई छू भी नही सकते
सब, छू-मंत्र हो जाते है
और , आप तो वैसे भी
जेहन में याद आती रहती हो
कहा कहा घूमती रही कभी
कोई हाथ भी नही लगा सका
क्यूंकि , ईश्वर ने सुरक्षा दी है
मेरी ही नही, सभी की
तुम भी
मई इधर थोड़ी व्यस्त थी
घर के कामों में
नही आ सकी
आप ऐसा नही सोचें
कृष्ण की मुझे पर
बहुत कृपा है
वे मेरी रक्षा करते है
मुझे कोई छू भी नही सकते
सब, छू-मंत्र हो जाते है
और , आप तो वैसे भी
जेहन में याद आती रहती हो
कहा कहा घूमती रही कभी
कोई हाथ भी नही लगा सका
क्यूंकि , ईश्वर ने सुरक्षा दी है
मेरी ही नही, सभी की
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