आज महादेवी के संस्मरण पढ़े
उस जमाने में भी उन्हें जो हासिल था
वो, तो, हमे आज भी नही मिला
फिर भी लिखना अच्छा लगता है
ऐसा लगता है
कागज पर उकेरे शब्द हमेशा मेरे साथ होते है
सब मुझे नही समझ सकते
किन्तु, शब्दों की साधना ने
दिल के दर्द और
अकेलेपन को समझा है
इश्लीए
इसे मई एक साधना और
साथी दोनों मानती हूँ
और, किसी से भी कह सकती हूँ
की, जब दुनिया में कोई आपकी दिल की बात न सुने
तब, आप कागज से
दिल का हाल जरूर कहिये
ये, आपको , सुकून देगा
लिखने की शुरुआत भी इन्ही से होती है
किन्तु, कोई न, छपे तो
हताश नही होना
आजकल, साहित्य नही छपता
पत्रिकाओं में पहचान जरुरी होती है
फिर भी
लिखना एक सुकून भरा अहसास होता है बहुत बार तो
हम, जाने कितना कुछ
कागजों में समेत लेते है
जोगेश्वरी सधीर
उस जमाने में भी उन्हें जो हासिल था
वो, तो, हमे आज भी नही मिला
फिर भी लिखना अच्छा लगता है
ऐसा लगता है
कागज पर उकेरे शब्द हमेशा मेरे साथ होते है
सब मुझे नही समझ सकते
किन्तु, शब्दों की साधना ने
दिल के दर्द और
अकेलेपन को समझा है
इश्लीए
इसे मई एक साधना और
साथी दोनों मानती हूँ
और, किसी से भी कह सकती हूँ
की, जब दुनिया में कोई आपकी दिल की बात न सुने
तब, आप कागज से
दिल का हाल जरूर कहिये
ये, आपको , सुकून देगा
लिखने की शुरुआत भी इन्ही से होती है
किन्तु, कोई न, छपे तो
हताश नही होना
आजकल, साहित्य नही छपता
पत्रिकाओं में पहचान जरुरी होती है
फिर भी
लिखना एक सुकून भरा अहसास होता है बहुत बार तो
हम, जाने कितना कुछ
कागजों में समेत लेते है
जोगेश्वरी सधीर
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