अचानक मन का भयग्रस्त होना
सदैव उसी भय से
आक्रांत रहना
अपनी सुरक्षा के लिए
अपने सुखों के लिए
भय को हमजोली बना लेते है
भय जो मन को
ह्रदय को खाता रहता है
जैसे चूहा कपड़े को
कुतरता है
सदैव उसी भय से
आक्रांत रहना
अपनी सुरक्षा के लिए
अपने सुखों के लिए
भय को हमजोली बना लेते है
भय जो मन को
ह्रदय को खाता रहता है
जैसे चूहा कपड़े को
कुतरता है
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