Tuesday, 8 March 2016

sidhiyan: इन्ही नही समझ में आ रहा है किएक देशद्रोही की बरसी...

sidhiyan: इन्ही नही समझ में आ रहा है कि
एक देशद्रोही की बरसी...
: इन्ही नही समझ में आ रहा है कि एक देशद्रोही की बरसी मनाने की किसी उनिवेर्सिटी वालों को क्या जरुरत थी इतने किसान रोज आत्महत्या करते है उ...
इन्ही नही समझ में आ रहा है कि
एक देशद्रोही की बरसी मनाने की
किसी उनिवेर्सिटी वालों को
क्या जरुरत थी
इतने किसान रोज आत्महत्या करते है
उनके लिए कोई धिक्कार दिवस ये लोग क्यों
नही मनाते
इतनी गौएँ बेरहमी से काटी जाती है उसपर
ये लोग क्यों खामोश है क्या
गौओं को बेरहमी से हलाल करना
किसानों की आत्महत्या
इनकी असहिष्णुता में शामिल नही है 

Monday, 7 March 2016

अचानक मन का भयग्रस्त होना 
 सदैव उसी भय से 
आक्रांत रहना 
अपनी सुरक्षा के लिए 
अपने सुखों के लिए 
भय को हमजोली बना लेते है 
भय जो मन को 
ह्रदय को खाता रहता है 
जैसे चूहा कपड़े को 
कुतरता है