मेरे हास्टल की सीढियाँ थी वे टर्न होती, साँझ के धुंधलके में घिरी
आज भी जिंदगी उतने ही धुंधली लगती है
पर, मई ईश्वर पर यकीन करती हूँ रोज उसका नाम लेकर उठती हूँ
आज भी जिंदगी उतने ही धुंधली लगती है
पर, मई ईश्वर पर यकीन करती हूँ रोज उसका नाम लेकर उठती हूँ
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