Monday, 31 August 2015

देश को जरुरत है ग्रंथालयों की 
किन्तु , जो सरकारी लाइब्रेरी है 
उनसे सरकारी प्रशाशन उदासीन है 
यंहा  तक कि जनता भी सुध नही ले रही 
तो, जो चिंतको  व् साहित्यकारों ने लिखा है 
उसे कौन पढ़ेगा , कोई नही चाहता ,
किताबें पढ़ना 

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