Monday, 2 September 2013

vo hath marne ka vakya

वो, जोरात  के ८ बजे  हमे सुनसान रस्ते पर कालेज के पहले , रिक्शे में जाते समय एक बाइक से आ रहे , दो लडकों में से एक ने हवा में हाथ लहराते हुए हमे जोरों से हाथ मारा था , वो इतनी तेजी से था ,कि संभलने या सोचने का वक्त नही मिला, यंहा तक की मई खुद को बचा भी नही सकी , उसने इस तरह लहराते हुए हाथ, मुट्ठी में भर लिया , जैसे आटा भिगाते समय करते है 

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