वो एक नन्हा सा बच्चा, जो आज रात मेरे सपने में आया था, मै एक फिल्म की शुटिंग देख रही थी, जन्हा उस बच्चे को अकेला देखती हूँ , तब उसे अपने पास बुला लेती हु, वो दो बरस का बच्चा अकेला दीखता है, बहुत सुस्त और उदाश सा , उसे ज्योंही अपनी गोद में लेती हु, वो बहुत खुश होता है।तभी मेरी नींद खुल जाती है, और मुझे याद आता है, बरसों पहले अपने कोख से एक नन्ही सी जान को दुनिया में आने से पहले ही, उजाड़ देने का , शायद तबसे ही, मुझे उष नन्ही सी जान की याद रहती है ,उसे याद करती हु, वो मेरा बेटा था, सोनू के बाद का, दूसरा बेटा, जिसे मेरी आऐएएस की एक्साम के लिए , उसकी आहुति दी गयी , वो जैसे आज भी अकेला मेरी ममता की प्रतीक्षा करता है
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