देश को जरुरत है ग्रंथालयों की
किन्तु , जो सरकारी लाइब्रेरी है
उनसे सरकारी प्रशाशन उदासीन है
यंहा तक कि जनता भी सुध नही ले रही
तो, जो चिंतको व् साहित्यकारों ने लिखा है
उसे कौन पढ़ेगा , कोई नही चाहता ,
किताबें पढ़ना
किन्तु , जो सरकारी लाइब्रेरी है
उनसे सरकारी प्रशाशन उदासीन है
यंहा तक कि जनता भी सुध नही ले रही
तो, जो चिंतको व् साहित्यकारों ने लिखा है
उसे कौन पढ़ेगा , कोई नही चाहता ,
किताबें पढ़ना