sidhiyan
Sunday, 9 June 2013
चापलूसी-तन्त्र से महल भले ही खड़े कर लो , किन्तु साहित्य ,सभ्यता व् संस्कृति का विकास नही हो सकता .यंहा लिखने से ज्यादा छपने के लिए लुटाना पड़ता है .
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