आज भी अपनी आठ पुस्तकें छप जाने के बाद भी मेरे लिए दिन पर दिन नई मुसीबतें है, मई उनसे नही निकल पाऊँगी, जिनके लिए मई लद जाती थी, अब वो मुझसे अलग हो चुके ह, मुझे मेरे बेटे के साथ उस ग्लिज्प्न को सहना है, जिसे सह पाने का मुझे मुझे हमेशा डॉ रहा ह, अपने बेटे के लिए जीना चाहती हु, इतना असं नही होता बिना किसी की पहचान के इस लेखन के निर्मम क्षेत्र में पहचान बना लेना।